सफलता एक ऐसा शब्द है जिसे पाने के लिए लोग न जाने कितनी मेहनत करते हैं। कितनी उम्मीदों के साथ चलते हैं। कुछ लोग आगे बढ़ जाते हैं, ऊँचाइयाँ छू लेते हैं। लेकिन बहुत सारे लोग ऐसे भी होते हैं जो बार-बार असफल होते हैं। धीरे-धीरे असफलता उनकी आदत बन जाती है। उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन जाती है।
एक समय के बाद उन्हें लगने लगता है कि शायद वे कभी सफल हो ही नहीं सकते।
पूरी मेहनत करने के बाद भी।
ईमानदारी से कोशिश करने के बाद भी।
वे किताबें पढ़ते हैं।
वीडियो देखते हैं।
खुद को बदलने की कोशिश करते हैं।
कभी ज्योतिष के पास जाते हैं, कभी उपाय करते हैं, कभी मंदिर, कभी मस्जिद, कभी गिरजाघर।
लेकिन फिर भी कुछ नहीं बदलता।
धीरे-धीरे मन में एक बात बैठ जाती है —
“शायद मेरी किस्मत ही ऐसी है।”
“शायद मैं किसी बड़े काम के लिए बना ही नहीं हूँ।”
मैं जो यह बातें लिख रहा हूँ, यह कोई किताबी ज्ञान नहीं है।
यह मेरी खुद की ज़िंदगी का अनुभव है।
मैंने इस दौर को बहुत लंबे समय तक जिया है।
लेकिन सवाल यह है —
क्या असफलता सच में स्थायी होती है?
क्या हम इसके साथ ही जीने के लिए बने हैं?
जवाब है — नहीं।
यहाँ सफलता का मतलब सिर्फ पैसा या करियर नहीं है।
सफलता हर उस क्षेत्र में है जहाँ हम बेहतर होना चाहते हैं —
पढ़ाई में, करियर में, रिश्तों में, जिम्मेदारियों में, जीवन में।
सफलता हर इंसान का जन्मसिद्ध अधिकार है।
तो फिर ऐसा क्यों होता है कि कुछ लोग कम मेहनत में भी आगे निकल जाते हैं,
और कुछ लोग सब कुछ करने के बाद भी वहीं के वहीं रह जाते हैं?
इसका जवाब बाहर नहीं, हमारे दिमाग के अंदर है।
एक छोटा सा उदाहरण
मैं आपसे एक बहुत साधारण सा काम करने को कहता हूँ।
एक गिलास लीजिए और उसे पूरा पानी से भर दीजिए।
अब दूसरा गिलास लीजिए और उसमें पानी भरकर पहले वाले भरे हुए गिलास में डालिए।
आप पाएँगे कि पानी बाहर गिर रहा है।
अब आप कहेंगे —
“यह तो सबको पता है, इसमें नया क्या है?”
यही बात हमारी ज़िंदगी में भी होती है।
बचपन से लेकर आज तक हमने जो भी सीखा, सुना, माना, डर, असफलता, शक, सीमाएँ —
हमारा दिमाग उनसे पूरा भर चुका है।
जब दिमाग भरा होता है,
तो वह कोई नई और अच्छी बात स्वीकार ही नहीं कर पाता।
समाधान क्या है?
गिलास को पहले खाली करना पड़ता है।
या तो पानी फेंककर, या पीकर।
उसी तरह ज़िंदगी में भी —
जब तक दिमाग खाली नहीं होगा,
असफलता का पैटर्न नहीं टूटेगा।
और दिमाग को खाली करने का सबसे सरल, सबसे प्रभावी तरीका है — ध्यान।
ध्यान क्यों ज़रूरी है?
यह पोस्ट यहीं खत्म नहीं होती।
यह एक पूरी सीरीज़ की शुरुआत है।
आने वाले पोस्ट्स में हम स्टेप बाय स्टेप उन सीढ़ियों की बात करेंगे
जो आपको सफलता की ओर ले जाती हैं।
मैं यह दावा नहीं करता कि
कल, परसों या एक हफ्ते में सब बदल जाएगा।
लेकिन मैं पूरे विश्वास के साथ यह कह सकता हूँ कि
अगर आप इन स्टेप्स को ईमानदारी से फॉलो करेंगे,
तो सफलता आपको जरूर मिलेगी।
यह कोई मोटिवेशनल जुमले नहीं हैं।
यह मेरे खुद के अनुभव हैं।
इस पूरी यात्रा का पहला कदम है —
खुद को खाली करना।
और खुद को खाली करने का सबसे सरल, सबसे सहज, सबसे प्रभावी तरीका है — ध्यान।
कुछ लोग इस शब्द को सुनते ही आगे नहीं पढ़ते।
कुछ लोग इसे धर्म से जोड़ देते हैं।
लेकिन ध्यान सिर्फ ध्यान है।
न धर्म, न पंथ।
अगर आपको सच में अपने जीवन के किसी भी क्षेत्र में सफल होना है,
तो यह पहला कदम आपको लेना ही होगा।
क्रम जारी रहेगा… (To be continued)
English version here:

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