इस सीरीज के पिछले पोस्ट में हमने सफलता की पहली सीढ़ी के बारे में बात की थी — ध्यान।
आज मैं उसी बात को थोड़ा और गहराई से, अपने अनुभव के आधार पर आपके सामने रखना चाहता हूँ।
सच कहूँ तो “ध्यान” शब्द मेरे सामने भी वर्षों तक आता रहा।
एक बार नहीं, सैकड़ों बार।
कभी किसी किताब में, कभी किसी वीडियो में, कभी किसी व्यक्ति की बातों में।
लेकिन मैंने कभी इस शब्द को गंभीरता से नहीं लिया।
सुनने में यह शब्द बहुत छोटा लगता है,
लेकिन यकीन मानिए, इसका प्रभाव आपके जीवन पर बेहद गहरा हो सकता है।
अभी आपकी परिस्थितियाँ मायने नहीं रखतीं
इस वक्त आप अपने जीवन में जिस भी स्थिति में हैं —
परेशानी, समस्या, तनाव, डर, असफलता —
ये सब बातें उतनी महत्वपूर्ण नहीं हैं।
महत्वपूर्ण यह है कि आप इससे बाहर निकलने के लिए क्या प्रयास कर रहे हैं।
मैं समझ सकता हूँ…
आपने भी कई बार वापसी (comeback) करने की कोशिश की होगी।
कई बार पूरी ताकत लगाई होगी।
मोटिवेशनल वीडियो देखे होंगे,
किताबें पढ़ी होंगी,
खुद को बदलने की कोशिश की होगी।
फिर भी असफलता शायद आपका पीछा नहीं छोड़ रही।
लेकिन मैं पूरे विश्वास के साथ यह कह सकता हूँ —
अगर आप सही दिशा में शुरुआत करते हैं,
तो आप अपनी आज की किसी भी स्थिति से बाहर निकल सकते हैं।
शुरुआत कहाँ से करनी है?
शुरुआत करनी है ध्यान से।
आप चाहे दिन में 5 मिनट करें,
10 मिनट करें,
15 मिनट,
आधा घंटा या एक घंटा —
आपका प्रतिदिन किया गया ध्यान आपके जीवन को ऐसी दिशा देगा
कि आप खुद हैरान रह जाएंगे।
देखिए,
आप कुछ करें या न करें —
दिन बीतता रहेगा,
रात होती रहेगी,
समय अपने आप चलता रहेगा।
आज आपको लग सकता है कि आपको तुरंत किसी मदद की ज़रूरत है।
लेकिन एक बार बस शुरुआत करके देखिए।
अगर आप लगातार 7–10 दिन भी ध्यान कर पाए,
तो आप खुद इसके असर को महसूस करेंगे।
जो चीज़ें अब तक आपके खिलाफ लगती थीं,
जो चीज़ें आपको डराती थीं,
जिनसे आप भागते थे —
वही चीज़ें धीरे-धीरे आपके पक्ष में होने लगेंगी।
मैं इसे ही चमत्कार कहता हूँ।
और हाँ, यह सच में चमत्कार जैसा ही लगेगा।
ध्यान कैसे करें? (बहुत सरल तरीका)
ध्यान के कई तरीके होते हैं,
लेकिन मैं आपको वही तरीका बता रहा हूँ जिसे मैं खुद अपने जीवन में करता हूँ।
मैं आनापानसति ध्यान करता हूँ —
जो गौतम बुद्ध द्वारा बताया गया एक बहुत ही सरल और प्रभावी ध्यान है।
इसके लिए:
- कोई विशेष तैयारी नहीं चाहिए
- कोई कठिन नियम नहीं
- कोई खास जगह भी ज़रूरी नहीं
बस इतना करना है:
शांत जगह पर बैठ जाइए,
आँखें बंद कीजिए,
और अपनी आती-जाती साँसों पर ध्यान लगाइए।
अंदर आती साँस को देखिए,
बाहर जाती साँस को महसूस कीजिए।
विचार आएँगे — यह बिल्कुल सामान्य है।
विचार आएँ तो परेशान न हों।
बस धीरे से अपना ध्यान फिर से साँसों पर ले आइए।
यही ध्यान है।
क्या इतना करने से सच में बदलाव आएगा?
आपको यह बात सुनकर अजीब लग सकती है कि
सिर्फ साँसों पर ध्यान देने से जीवन बदल सकता है।
लेकिन यही सच है।
आप चाहें तो:
- म्यूजिक का सहारा ले सकते हैं
- YouTube पर उपलब्ध guided meditation का उपयोग कर सकते हैं
शुरुआत ज़्यादा समय से मत कीजिए:
- पहले 10–15 मिनट
- फिर 20–25 मिनट
- धीरे-धीरे समय बढ़ाइए
आधा घंटा से एक घंटा पर्याप्त है।
ध्यान करने का सही समय कौन-सा है?
अगर “सबसे अच्छा समय” पूछें तो:
- सुबह 4 बजे के आसपास
- या 6–7 बजे
- या फिर 9–10 बजे
लेकिन सच्चाई यह है —
ध्यान का कोई निश्चित समय नहीं है।
सुबह न कर पाएं तो दोपहर में करें।
दोपहर न हो पाए तो रात में करें।
बस कोशिश यह होनी चाहिए कि
आप हर दिन ध्यान करें।
कम से कम 40 दिनों तक।
40 दिन इसलिए,
क्योंकि इतने समय में ध्यान आपकी आदत बन जाता है।
फिर आप इसके बिना रह ही नहीं पाते।
ध्यान का असली असर कब दिखता है?
7–10 दिनों में ही आपको फर्क दिखने लगेगा।
- दिमाग शांत होने लगेगा
- समस्याओं से ज़्यादा समाधान दिखने लगेंगे
- जो रास्ते पहले दिखाई नहीं देते थे, वे साफ़ दिखने लगेंगे
आपका ध्यान समस्या से हटकर
उसके समाधान पर जाने लगेगा।
आज आपको लग सकता है कि कोई रास्ता नहीं है,
लेकिन ध्यान शुरू करने के बाद
आप पाएँगे कि रास्ते तो हमेशा से थे —
बस आपको दिख नहीं रहे थे।
अगर ध्यान में मन भटकता है तो?
बहुत लोग यही सोचकर रुक जाते हैं कि
“मेरा ध्यान नहीं लग रहा।”
लेकिन सच यह है —
जब-जब आप अपना ध्यान
फिर से साँसों पर लेकर आते हैं,
उसी क्षण आपका ध्यान लग रहा होता है।
भटकना असफलता नहीं है।
वापस साँसों पर आना ही अभ्यास है।
यह इस सीरीज का दूसरा पोस्ट है।
मैं आपसे बस इतना ही कहूँगा —
ध्यान की शुरुआत जरूर कीजिए।
अगर इस विषय से जुड़ा कोई भी सवाल आपके मन में हो,
तो आप इस पोस्ट पर कमेंट करके पूछ सकते हैं।
मैं पूरी ईमानदारी से जवाब देने की कोशिश करूँगा।
इस सीरीज के तीसरे पोस्ट में
हम सफलता की अगली सीढ़ी के बारे में बात करेंगे। to be continue……

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