यह मेरे ब्लॉग का चौथा पोस्ट है। पिछले तीन पोस्ट में हमने ध्यान को समझने की कोशिश की। आज हम सफलता की सीढ़ी के अगले स्टेप — आभार (Gratitude) — पर बात करेंगे।
आभार हमारे जीवन का बहुत बड़ा हिस्सा होना चाहिए, लेकिन सच यह है कि हम अक्सर उसे नजरअंदाज कर देते हैं। हम हमेशा यह देखते हैं कि हमें क्या नहीं मिला, क्या कमी है, कौन सी समस्या है। लेकिन यह बहुत कम सोचते हैं कि हमारे पास क्या है।
आपने देखा होगा, मक्खी हमेशा घाव पर बैठती है, फूल पर नहीं। उसका स्वभाव ही ऐसा है। हमारा मन भी बिना जागरूकता के कुछ ऐसा ही होता है — वह अच्छी चीजों को छोड़कर कमियों पर बैठ जाता है।
मैं आपसे एक सीधी बात पूछता हूं। अगर कोई आपसे कहे कि अपने दोनों हाथों के बदले एक करोड़ रुपए ले लो — क्या आप मान जाएंगे? अगर कोई कहे आंखों के बदले दो करोड़ — क्या आप तैयार होंगे? बिल्कुल नहीं।
तो सोचिए, आपका शरीर कितना कीमती है। आपकी आंखें, आपके हाथ, आपके पैर — इनकी कीमत पैसों में नहीं लगाई जा सकती। फिर भी हम इनके लिए रोज धन्यवाद नहीं करते।
अगर आपके पास कुछ भी न हो, फिर भी अगर आप जीवित हैं — तो आपके पास बहुत कुछ है। जीवन सबसे बड़ी संपत्ति है।
आभार सिर्फ पैसे, घर या गाड़ी के लिए नहीं होता। आप अपने शरीर के हर अंग के लिए आभार व्यक्त कर सकते हैं। अपने परिवार के लिए, अपने बच्चों के लिए, माता-पिता के लिए, उस घर के लिए जिसमें आप रहते हैं — चाहे छोटा ही क्यों न हो।
जो भोजन आप खाते हैं, जो पानी आप पीते हैं, जिस हवा में सांस लेते हैं, सूरज की रोशनी, पेड़, धरती, आसमान — इन सबके लिए आप धन्यवाद दे सकते हैं।
ध्यान रखिए — जिस चीज पर आप ध्यान देते हैं, वही बढ़ती है। अगर आप कमी पर ध्यान देंगे, तो कमी बढ़ती जाएगी। अगर आप आभार पर ध्यान देंगे, तो संतोष, शांति और अवसर बढ़ने लगेंगे।
ध्यान मन को शांत करता है, और शांत मन ही सच्चा आभार महसूस कर सकता है। जब मन उलझा हुआ होता है, तब धन्यवाद भी औपचारिक लगता है। लेकिन जब आप ध्यान में आते हैं, तो आभार दिल की गहराई से उठता है।
आभार का मतलब यह नहीं कि आप अपने लक्ष्य छोड़ दें या मेहनत करना बंद कर दें। इसका मतलब है — जो है उसे स्वीकार करते हुए आगे बढ़ना। शिकायत आपको कमजोर बनाती है, आभार आपको मजबूत बनाता है।
आप एक छोटा सा अभ्यास शुरू कर सकते हैं। हर रात सोने से पहले आज की तीन ऐसी चीजें याद कीजिए जिनके लिए आप आभारी हैं। छोटी हों तो भी चलेगा। जैसे — आज शरीर ठीक था, आज किसी ने मुस्कुरा कर बात की, आज खाना मिला। बस 10–20 सेकंड आंख बंद करके धन्यवाद दीजिए।
सुबह उठते ही नए दिन के लिए धन्यवाद दीजिए। अगर आप ईश्वर को मानते हैं तो ईश्वर को धन्यवाद कहिए। अगर नहीं मानते, तो इस सृष्टि को, इस जीवन को धन्यवाद कहिए।
धीरे-धीरे आप देखेंगे कि आपके भीतर एक अलग तरह की शांति पैदा हो रही है। जो चीजें पहले साधारण लगती थीं, वही खास लगने लगेंगी।
धर्म ग्रंथों में भी कहा गया है — जो व्यक्ति केवल शिकायत करता है, उसकी कमी बढ़ती जाती है। लेकिन जो आभार व्यक्त करता है, उसके जीवन में नई संभावनाएं खुलती हैं।
यह कोई जादू नहीं है, यह मन का विज्ञान है। जब आप दिल से आभार व्यक्त करते हैं, तो आप अपने भीतर कमी की भावना को बदलकर पूर्णता की भावना जगाते हैं। और वही भावना आपको आगे बढ़ने की ताकत देती है।
आज से शुरू कीजिए। बहुत बड़ा कुछ नहीं करना है। बस हर दिन थोड़ा सा धन्यवाद।
अगले पोस्ट में हम सफलता की सीढ़ी के अगले कदम पर बात करेंगे।
क्रम जारी रहेगा… (To be continued)

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